Abstract
सार
लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि यह शासन, समाज और नागरिकों
के बीच सेतु का कार्य करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में मीडिया की भूमिका अत्यंत
महत्त्वपूर्ण हो जाती है, विशेषकर तब जब देश परंपरागत एवं गैर-परंपरागत आंतरिक सुरक्षा
चुनौतियों का सामना कर रहा हो। परंपरागत चुनौतियों में आतंकवाद, उग्रवाद, नक्सलवाद,
सीमा पार घुसपैठ और सांप्रदायिक तनाव शामिल हैं, जबकि गैर-परंपरागत चुनौतियों में साइबर
अपराध, फेक न्यूज, सूचना युद्ध, कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रसार, जैविक खतरे और आर्थिक
अस्थिरता जैसी समस्याएँ आती हैं। मीडिया इन चुनौतियों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने,
तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराने तथा सरकार की नीतियों और सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों
पर निगरानी रखने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाता है। स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया पारदर्शिता,
जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करता है, जिससे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक
समरसता को बल मिलता है। साथ ही, मीडिया संकट के समय संयमित रिपोर्टिंग द्वारा अफवाहों
और दुष्प्रचार को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकता है। हालाँकि, टीआरपी की दौड़, सनसनीखेज
प्रस्तुति और अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता
है। अतः मीडिया को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी का भी पालन
करना चाहिए। निष्कर्षतः, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की संतुलित, संवेदनशील और
राष्ट्रहितपरक भूमिका ही परंपरागत एवं गैर-परंपरागत सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग
से निपटने में सहायक हो सकती है।