Abstract
यह शोध-पत्र मुरादाबाद जनपद की ग्रामीण सामाजिक संरचना में हो रहे परिवर्तनों का परिवार, जाति, लैंगिक भूमिकाओं, आजीविका, शिक्षा, प्रवासन, संचार-प्रौद्योगिकी और स्थानीय सत्ता के संदर्भ में समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का तर्क है कि ग्रामीण परिवर्तन परम्परा के पूर्ण विघटन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि संस्थाओं के पुनर्संयोजन की बहुस्तरीय प्रक्रिया है। जनगणना-2011, जिला जनगणना पुस्तिका, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण तथा ग्रामीण परिवर्तन संबंधी साहित्य को द्वितीयक आधार बनाया गया है। साथ ही, 400 उत्तरदाताओं की प्रस्तावित स्तरीकृत सर्वेक्षण-रचना पर एक उदाहरणात्मक विश्लेषण दिया गया है। मॉडल परिणामों में प्रौद्योगिकी, आजीविका और लैंगिक भूमिका संबंधी परिवर्तन अपेक्षाकृत अधिक, जबकि जातिगत व्यवहार और वृद्ध-देखभाल संबंधी परिवर्तन असमान दिखाई देते हैं। शिक्षा, डिजिटल सम्पर्क, बाजार, प्रवासन और सरकारी योजनाएँ प्रमुख प्रेरक कारक उभरते हैं। परिवर्तन ने सामाजिक गतिशीलता, महिलाओं की निर्णयकारी भागीदारी और आय-विविधीकरण बढ़ाया है, किंतु उपभोग-आधारित प्रतिष्ठा, पीढ़ीगत तनाव, देखभाल-संकट और नई आर्थिक विषमताएँ भी उत्पन्न की हैं। निष्कर्षतः समावेशी ग्रामीण परिवर्तन के लिए शिक्षा की गुणवत्ता, महिलाओं की संपत्ति एवं रोजगार पहुँच, गैर-कृषि कौशल, डिजिटल साक्षरता, ग्राम-स्तरीय सामाजिक संवाद और संवेदनशील स्थानीय शासन आवश्यक हैं।