Abstract
शिक्षा बालक के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और विद्यालय उसके सामाजिक, भावनात्मक, बौद्धिक तथा व्यवहारात्मक विकास का प्रमुख केंद्र है। विद्यालयी जीवन में बालक का समायोजन उसके शैक्षिक विकास, आत्मविश्वास, सामाजिक सहभागिता तथा व्यक्तित्व निर्माण को प्रभावित करता है। समावेशी शिक्षा के अंतर्गत सामान्य एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समान विद्यालयी वातावरण में शिक्षा प्रदान करने पर बल दिया जाता है। विशेष बच्चों के प्रभावी समायोजन के लिए सहायक उपकरण, उपयुक्त शिक्षण विधियाँ, संवेदनशील शिक्षक, सहयोगी सहपाठी तथा सकारात्मक विद्यालयी वातावरण आवश्यक हैं। प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत सामान्य एवं विशेष छात्रों तथा छात्राओं के समायोजन की तुलना करना हैं। अध्ययन में सामान्य बच्चों से आशय ऐसे विद्यार्थियों से लिया गया है जिनमें कोई प्रमाणित विशेष आवश्यकता नहीं है, जबकि विशेष बच्चों से आशय ऐसे विद्यार्थियों से है जिन्हें शारीरिक, दृष्टि, श्रवण, अधिगम अथवा अन्य विशेष आवश्यकताओं के कारण अतिरिक्त शैक्षिक सहायता की आवश्यकता होती है। समायोजन से आशय विद्यालयी, सामाजिक, पारिवारिक, संवेगात्मक एवं व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ प्रभावी एवं संतुलित सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता से है। अध्ययन हेतु कुल 500 विद्यार्थियों को न्यादर्श के रूप में सम्मिलित किया गया तथा समायोजन के मापन के लिए सीमा रानी एवं डॉ. बसन्त बहादुर सिंह द्वारा निर्मित समायोजन परीक्षण का प्रयोग किया गया। शोध में निष्कर्ष रुप में पाया कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत सामान्य एवं विशेष छात्रों के समयोजन में सार्थक अन्तर नहीं पाया गया, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत सामान्य एवं विशेष छात्राओं के समयोजन में सार्थक अन्तर नहीं पाया गया।